" पाकिस्तान और भारत का एक शर्मनाक तुलनात्मक अध्ययन करें तो हम पायेंगे कि जिस पाकिस्तान को हम बुरा-भला कहने, कोई भी दोष मडने से नहीं चूकते, वह फिर भी हमसे बेहतर स्थिति में है। पाकिस्तान तो फिर भी इस आतंकवाद के सहारे कुछ अर्जित कर रहा है, हमने तो केवल और केवल गंवाया ही है।"
पर गोदियाल साहब शायद ये भूल गए हैं की हमने भी काफी कुछ कमाया हैं इन सब से.
तो चलो में बताता हूँ की हमारी कमाई कहा कहा हुई हैं.
सबसे पहले तो हमने कमाई हैं शर्मिंदगी .
इतना शक्तिशाली देश होते हुए भी हमने अपने प्राचीन राजनीती को झूठा आधार बनाकर (कि हम किसी से झगडा नही करते, किसी को कष्ट नही पहुंचाते चाहे वो हमारा कुछ भी कर ले) अपनी कायरता के सहारे कमाई हैं अपार शर्मिंदगी.
आपको याद होगा की कुछ दिन पहले बंगलादेश ने हमारे चालीस - पचास सैनिको को शहीद कर दिया था और हमारी सरकार ने उसका मुह तोड़ जवाब देने के बजाये एक कमिटी का गठन कर दिया जो ये चेक करेगी की गलती किस की हैं
- नही तो इसका सबसे अच्छा हल ये होता की हमारी सेना पचास- सौ बंगला सैनिको को मार डालती और फिर कमिटी बैठाते.
इसके बाद कमाई हैं हमने जिल्लत भरी जिंदगी .
- कोई हमारे घर में घुश कर हमें मारने की कोशिश करे तो सायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा की जो इसका जवाब न देना चाहे.
कुछ लोग हमारे देश के घर मतलब की संसद पर हमला करते है और अपनी सरकार 28 दिनों तक कोई फैसला ही नही ले पाती की हमें क्या करना चाहिए.
और जब कुछ करने की सोचते हैं तो इनका बाप अमेरिका बीच में आ जाता हैं जबकि सभी को पता हैं की 9/11 हमले का जवाब खुद अमेरिका ने कैसे दिया था .
कितने साल हो गए वहां अब किस की हिम्मत हैं जो दोबारा ये सब दोहराएगा ?
और क्या क्या गिनवाऊ आपको.
भारत ने अपार कमाई की हैं .
संसद पे हमले के दोषियों का क्या हुआ .
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संसद पे हमला |
और जब ऐसे देश में नपुंशक नेता और ऐसे ही परधानमंत्री हो तो ये कमाई आगे भी बढती ही जायेंगी .
आप चिंता मत करो .
कभी अजहर मसूद के नाम पर तो कभी दौअद के नाम पर ठगे जाते हैं लोग पर कमिटी के शिवाय कुछ नही होता यहाँ.
कभी कारगिल के नाम पर तो कभी सरहदों के नाम पर .
और इस सबके जिम्मेदार हमारे घटिया राजनेता हैं.
हम हर घटना में अपने सैनिक, अपने देशवासियों को खो देते हैं और बदले में मिलता क्या हैं सिर्फ कमिटिया .
कुछ तो शर्म करो देश के राजनेताओ .
Bahut Sahi likha hai aapne... parntu ham log hi aisi sarkaar chun kar bhejte hain. Agar kuch badalna hai to pahal hamain hi karni hogi. Sahi netaon ko chun kar
जवाब देंहटाएंराणा साहब , ये सब गंदी राजनीति का हिस्सा है ! अब अफजल गुरु का केस देख लो , चार साल से शीला दीक्षित उसकी फ़ाइल को दबाये बैठी थी , और अचानक जब मीडिया में यह बात उठी तो फिर सक्रियता दिखानी शुरू कर दी, सिर्फ धुल झोंकने के लिए ! आप कोई यह मान सकता है की शीला दीक्षित ने सिर्फ अपने बलबूते पर यह फ़ाइल चार साल दबाये रखी ?
जवाब देंहटाएंbilkul thik kaha aapne
जवाब देंहटाएंye sab ghatiya rajniti ke karan hi hota hain.
जवाब देंहटाएंgodiyaal ji ne sahi kaha ki ab jakar afjal ka case aage badha hain.
"और जब ऐसे देश में नपुंशक नेता और ऐसे ही परधानमंत्री हो तो ये कमाई आगे भी बढती ही जायेंगी .
जवाब देंहटाएंआप चिंता मत करो ."
बहुत बढ़िया राणा साहब!आज तो खतरनाक अंदाज दिखाई दे रहे है!
वैसे ये एक एक मार्मिक अभिव्यक्ति रही!
कुछ हमारी बौद्धिक लाचारी कुछ उनकी अमानवीय होश्यारी...
कुछ कलयुग कह दूं कुछ जैसी कैसी भी किस्मत हमारी....
शर्मनाक तो ये है....
कुंवर जी,
केवल औरतों के ब्लागों पर जा-जाकर वाह-वाह करने वाले लोगों देश को छोटा करके मत आंकिए। ये देश कागज का नक्शा नहीं है जिसे आप जैसे घटिया लेखक जब चाहे फाड़कर फेंक दोंगे।
जवाब देंहटाएंजो देश को नहीं मानता उसे जलजला गद्दार मानता है। अपने घटिया विचारों में देश को मत रगडिए। चोट व्यवस्था पर करिए।
राणा साहब आप इसी तरह लगे रहे तो बहुत जलदी हिन्दू जागेगा और जिस दिन हिन्दू जागेगा उस दिन् गद्दारों का नमोनिशान मिटा देगा
जवाब देंहटाएं@ कुमार जलजला जी, आपका स्वागत हैं
जवाब देंहटाएंआपने ठीक कहा है की जो देश को नही मानते उसे गद्दार माना जाता हैं . ये आप क्या हर उस भारतीय की सोच हैं जो अपने देश से प्यार करता हैं .
रही बात देश को रगड़ने की तो मैंने यहा सिर्फ उन राजनीतिज्ञों पर चोट की हैं जो बिना सोचे समझे और सिर्फ अपने हित के लिए अपने देशभक्त सैनिको को शहीद करवाने पे तुले हैं .
आपको इसमें क्या गलत लगा.
मैं गोदियाल जी के विचारों को हमेशा सराहता हूँ.... मुझे याद है जब उन्होंने टिप्पणी का ऑप्शन बंद कर दिया था...तो मैं कितना परेशां हुआ था.... आपकी भी यह पोस्ट बहुत अच्छी लगी....
जवाब देंहटाएं--
www.lekhnee.blogspot.com
सुनील जी से सहमत राणा जी....
जवाब देंहटाएंकुंवर जी,
भाई ज़लज़ला, राणा जी ने व्यवस्था पर ही चोट की है… आपने समझने में थोड़ी भूल कर दी है…
जवाब देंहटाएंये बदतरीन व्यवस्था ही है, जो इस देश में इतनी शर्मिंदगी उठाने के बावजूद लगातार कांग्रेस (सॉरी एक परिवार) को ही चुनती आ रही है…।
@सुरेश जी आपका धन्यवाद लेख की सहमति के लिए
जवाब देंहटाएं@महफूज भाई आपका स्वागत हैं
@कुमार जलजला जी
जवाब देंहटाएंमेरे विचार से आपने मेरी पूरी पोस्ट या तो पढ़ी नही या फिर आप इसका सन्देश गलत ले बैठे.
भाई जितना आपको इस देश पे नाज है और जितना गुस्सा आपको आ रहा हैं उससे कही ज्यादा गुस्से को हम पी चुके हैं.
और रही बात गुस्से की तो कई बार इसको उजागर करना भी काफी जरुरी हो जाता हैं .
किसी ने ठीक ही कहा हैं की अगर आप अपने घर में शान्ति रखना चाहते हो तो आपको अपने पडोसी के दिमाग में ये बात डालनी ही पड़ेगी की अगर वो कुछ गलत करेगा तो आप उसको जबरदस्त जवाब दोगे .
तो फिर देखना की आपको छेड़ने से पहले वो बार बार सोचेगा ?
भारत को भी कभी तो ये भी करना चाहिए ना.
हम शांति चाहते हैं पर ये जरुरी तो नही की पडोसी मुल्क भी शान्ति ही चाहते होंगे ?
मेरी पुराणी पोस्ट भी पढ़ना और मुझे आशा हैं की आपका नजरिया बिलकुल बदल जाएगा .
राणा जी आपने सही कहा है ..शर्म की बात है
जवाब देंहटाएंkunwarji's ki baat se ittifaq raktta hun