khabre

गुरुवार, 20 मई 2010

अ दिल तोड़ने वाले इतना तो सोचा होता की .............. टूटा हुआ दिल किसी के काम नही आता

कुछ चुनिन्दा शेर-ओ-शायरी हो जाए आज.
तो लीजिए पेश हैं कुछ चुने हुए शेर .
 संजीव राणा की पसंद के.
और आशा करता हूँ की आपको भी पसंद आयेंगे .




हस्ती मिट गई आशिया एक सजाने में

उम्र बीत गई हाले दिल उनको सुनाने में 

एक पल में ही वो बेगाने हो गए हैं देखिये 

कई बरस लगे जिन्हें अपना बनाने में .

*

टूटे पैमाने में जाम नही आता 

इश्क के रोगी को आराम नही आता 

अ दिल तोड़ने वाले इतना तो सोचा होता की 

टूटा हुआ दिल किसी के काम नही आता .


*

हमने बना लिया हैं फिर से नया आशियाना 

जाओ फिर ये बात किसी तूफ़ान से कह दो 

*

इस तरह जीना है बहुत  दुश्वार सा 

तू भी तलवार सा, मैं भी तलवार सा 

*


8 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा प्रयास है ...कम से कम लीक से हटकर कुछ तो है.
    इक नज़र यहाँ भी मार लीजिये
    www.jugaali.blogspot.com

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  2. एक शेर हमारी पसंद का भी.....



    कैसी चारागरी है इलाज कैसा है?

    ज़हर देकर पूछते है है मिजाज़ कैसा है...

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  3. @दिलीप जी चलो कम से कम आज तो आपकी नजर तो इस ब्लॉग पे पड़ी . स्वागत हैं आपका

    @ कुंवर जी आपका तो कोई सानी ही नही हैं .

    @ संजीव जी आपका भी स्वागत हैं .

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  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  5. सूअर की चर्वी से तला न आ जाये,
    कीचड में सड़ा-गला न आ जाये !
    शेरों को संभाल के रखना राणा जी,
    फिर कोई जलाजला न आ जाये !

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  6. @गोदियाल साहब

    बात वही कहेंगे जो सच्ची हैं
    क्या उनका कहना जो कच्ची हैं.
    हो अगर तर्कसंगत बात तो स्वागत हैं जलजले का भी
    वरना ऐसे लोगो की बजाये दो -४ से ही दोस्ती अच्छी हैं

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